Wednesday, October 23, 2013

कौन कहता है पुराना वक़्त लौट कर नहीं आता

ये लाइन जो मैंने लिखी है ये लाइन आजादी के पहले नेहरु जी ने अपनी पुस्तक भारत की खोज में लिखी थी |

और बिडम्बना देखिये तब की कही बाते आज लफ्ज़ व लफ्ज़ आज कैसे सटीक बैठ रही है। 



आज की दुनिया ने बहुत कुछ हासिल किया है लेकिन मानवता के प्रति प्रेम की घोषणा के होते हुए भी उनकी बुनियाद उन खूबियों की जगह, जो आदमी को इंसान बनाती है, नफरत और हिंसा से ज्यादा रही है। 
भी कभी ऐसा हो सकता है की लड़ाई का टालना मुमकिन ना हो,लेकिन उसके नतीजे बहुत खतरनाक होते है। उसमे सिर्फ आदमियों की जान ही नहीं ली जाती बल्कि जान बूझकर लगातार झूठ और नफरत का प्रचार किया जाता है और धीरे धीरे ये बातें लोगो की आम आदत हो जाती है।
अपनी जिन्दगी के बहाव के बहाव में नफरत और झूठ के इशारो पर चलना बहुत खतरनाक होता है। उससे ताकत की बर्बादी होती है दिमाग संकरा और विकृत हो जाता है और सच्चाई को देखने में रूकावट होती है।
दुःख की बात ये है की आज हिंदुस्तान में बहुत सख्त नफरत है। गुजरा जमाना हमारा पीछा करता है और मौजूदा जमाना उससे अलग नहीं है।
धर्म और जातियों की शान पर जो बार बार चोट की गयी है और की जा रही है उसको भूलना आशान नहीं है। लेकिन खुशकिस्मती से हिन्दुस्तानियों में नफरत की आदत नहीं है और जल्दी ही उनकी सद्व्रतिया ऊपर आ जाती है।

भारत की खोज का एक अंश

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