Wednesday, October 23, 2013

इतनी मगझमारी क्यों ?


अजीब सा शोर जो आज के पहले कभी नही देखा। अजीब सी कशमकस शायद एक दूसरे से आगे निकलने की होड़।
कहावत है "ये तूफ़ान के  आने से पहले की ख़ामोशी है " लेकिन यह आज कल सब उल्टा पुल्टा हो रहा है यहाँ तूफ़ान के आने से पहले ही इतना शोर है कि क्या बताये।  शायद हम पीछे ना रह जाये उसे सब ना मिल जाये दौड़ो रे बाबा दौड़ो क्या छोटा क्या बड़ा सब भागे जा रहे है।
सवाल उठता है इतनी मगझमारी क्यूँ ?
आप शायद  अभी तक समझे नहीं आगे पढ़िए सब समझ आ जायेगा।

अपनी  लाइन लम्बी दिखाने के लिए दूसरी की लाइन को छोटा किया जा रहा है। कोशिश अपनी लाइन को लम्बा ना करने की होकर दूसरे की लाइन मिटाने में लगे है।
पत्रकारिता का इतना गन्दा और बेहूदा स्तर देखकर तो बस एक ही चीज़ याद आती है क्यूँ ना सास बहू के सीरियल में इंटरेस्ट जगाया जाये पर कमबख्त ये भी नही होता।

अब्दुल कलाम जी के अनुसार 
यहाँ का मीडिया इतना निगेटिव क्यूँ है ? हम भारतीय अपनी स्वयं की शक्ति पहचानने से क्यूँ घबराते है ?

हम सब एक महान राष्ट्र है। हमारी सफलता की कहानिया आश्चर्यचकित करने वाली होती है। लेकिन हम उन्हें ख़ारिज कर देते है। क्यूँ ?
हम दुग्ध उत्पादन में सबसे अव्वल है। हम दूर संवेदी उपग्रहों में सबसे अव्वल है। गेंहू उत्पादन मामले में हम दुसरे नंबर में आते है। हम सबसे बड़े चावल उत्पादक भी है।
डॉक्टर सुदर्शन को देखिये उन्होंने एक आदवासी गाँव को स्वपोषित और आत्मनिर्भर बना दिया। इस तरह लाखो उपलब्धिया है लेकिन हमारा मीडिया बुरी खबरों , विफलताओ और आपदाओ के पीछे पड़ा रहता है।

एक बार मैं (डॉक्टर कलाम) तेल अबीब में था और एक इजराइली अखबार पढ़ रहा था। पिछले दिनों इजराइल पर बहुत हमले हुए थे बम बरसाए गये थे और अनेको मौते हुई थी। हमले हमास ने किये थे। लेकिन अख़बार के मुख्य प्रष्ठ पर एक यहूदी भद्र पुरुष की तस्वीर छापी थी। जिन्होंने पांच सालो में अपनी उसर भूमि को आर्किड और उपजाऊ भूमि में बदल दिया। सुबह उठकर लोगो ने सबसे पहले प्रेरक तस्वीर देखी। हत्या बमबारी और मौत की भयानक खबरे अन्दर के पेजों में छपी थी।
भारत में केवल हम मौत बीमारी आतंकवाद और अपराध की खबरे पढ़ते है आखिर हम इतना नेगेटिव क्यूँ है ?


   

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